आशा और मेरा फैसला

 मैं अपने घर से अपनी दुकान के लिए निकला ही था कि रास्ते में मुझे मेरा दोस्त निखिल मिला। उसने मुझे कहा राजेश क्या तुम मुझे मेरे ऑफिस तक छोड़ दोगे। मैंने निखिल को कहा ठीक है मैं तुम्हें तुम्हारे ऑफिस तक छोड़ देता हूं। मैंने निखिल को उसके ऑफिस तक छोड़ दिया था रास्ते में हम लोगों की काफी बातें हुई। उस दिन निखिल से बातें कर के मुझे भी काफी अच्छा लगा था काफी टाइम बाद निखिल से मेरी मुलाकात हो रही थी उससे मिलकर मुझे अच्छा लगा था। मैं उसे छोड़ने के बाद अपनी दुकान में चला आया था। मुझे उस दिन काफी ज्यादा काम था दुकान में काफी लोग भी आए थे मेरी दुकान काफी अच्छी से चलती है इस वजह से मुझे बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता था।
मैं अपने काम से बड़ा ही खुश हूं उस शाम जब मैं घर लौटा तो पापा और मम्मी मुझे कहने लगे राजेश बेटा कल हम लोग जयपुर जा रहे हैं। मैंने पापा से कहा लेकिन अचानक से आप लोग जयपुर जा रहे हैं। उन्होंने मुझे बताया जयपुर में उन्हें कुछ जरूरी काम है मैंने पापा से इस बारे में नहीं पूछा पर पापा और मम्मी अगले दिन सुबह ही जयपुर चले गए थे। जब वह लोग जयपुर गए मैं घर पर अकेला ही था इसलिए मैं अपनी दीदी के घर चला जाया करता था। दीदी की शादी हमारी कॉलोनी में हुई है मैं अपने काम से लौटता तो मैं दीदी के पास चला जाया करता था। पापा और मम्मी भी कुछ दिनों बाद जयपुर से लौट आए थे। जब वह लोग जयपुर से लौटे तो उन्होंने एक दिन मुझे अपने साथ अपने दोस्त के घर चलने के लिए कहा और मैं उस दिन पापा मम्मी के साथ चला गया लेकिन मुझे क्या मालूम था वह लोग उनके दोस्त की बेटी आशा से मुझे मिलवाने वाले हैं। जब उन्होंने मुझे आशा से मिलवाया तो मैं आशा से पहली बार ही मिला था मुझे उससे मिलकर अच्छा लगा था। वह लोग चाहते थे हम दोनों शादी कर ले मैं पापा और मम्मी की बात को मना ना कर सका और उन लोगों ने हमारी सगाई करवा दी।
अब हम दोनों की सगाई भी हो चुकी थी। हम दोनों की इंगेजमेंट हो जाने के बाद मेरी आशा से अक्सर बात होती ही रहती थी। जब भी मैं आशा से बात करता मुझे उससे बातें करना बहुत ही अच्छा लगता था। मुझे लगता था आशा बहुत ही शर्मीले किस्म की है लेकिन समय के साथ-साथ अब हम दोनों की बातें भी काफी ज्यादा बढ़ने लगी थी हम दोनों एक दूसरे से बहुत ही बात किया करते। जब भी हम दोनों एक दूसरे से फोन पर बातें करते हम दोनों को बड़ा अच्छा लगता था जिस तरीके से हम दोनों की बातें होती उससे मेरे और आशा के बीच में प्यार भी होने लगा था। हम दोनों एक दूसरे को मिला करते थे जब भी हम लोगों की मुलाकात होती हम दोनों बड़े ही खुश रहते। एक दिन मैं आशा को मिलने के लिए उसके घर के बाहर ही एक रेस्टोरेंट हैं वहां पर गया हुआ था। जब मैं आशा को मिला तो मुझे अच्छा लगा मुझे पता ही नहीं चला कब हम दोनों को साथ में बैठे हुए काफी समय हो चुका था अब मैं घर लौट रहा था लेकिन जब मैं घर लौटा तो रास्ते में मेरी मोटरसाइकिल का टायर पंचर हो गया था जिस वजह से मुझे वहीं पास में अपनी मोटरसाइकिल का पंचर ठीक करवाना पड़ा और मुझे घर पहुंचने में देरी हो गई थी।
जब मैं घर पहुंचा तो पापा और मम्मी मेरा इंतजार कर रहे थे उन्होंने मुझसे कहा कि  राजेश बेटा तुम घर देरी से आ रहे हो और तुम्हारा नंबर भी नहीं लग रहा था। मैंने पापा से कहा मेरा फोन स्विच ऑफ हो गया था रास्ते में मेरी बाइक का टायर भी पंचर हो गया था मैं वही ठीक करवा रहा था। अब हम लोगों ने डिनर किया और उसके बाद मैं अपने रूम में चला गया। मैंने आशा से उस रात काफी देर तक फोन पर बातें की मुझे उस से फोन पर बाते कर के बहुत ही अच्छा लग रहा था। आशा से जब भी मैं बातें करता मुझे बहुत अच्छा लगता था और हमारी फोन पर काफी बातें होती रहती थी। आशा भी कभी कबार मुझे मिलने के लिए आ जाए करती थी अब हम दोनों की शादी को लेकर घर पर बातें होने लगी थी सब लोग चाहते थे हम लोग जल्द से जल्द शादी कर ले।
मैंने और आशा ने भी फैसला कर लिया था अब हम दोनों शादी कर लेंगे। जब मेरी शादी आशा के साथ हुई मैं बड़ा ही खुश था और आशा भी बड़ी खुश थी जिस तरीके से हम दोनों की शादी हुई और हम दोनों की शादी बड़े ही धूमधाम से हुई थी। हम दोनों की शादी हो जाने के बाद आशा घर में सब लोगों की चहेती बन गई मां और आशा की बहुत ज्यादा बनने लगी थी। हम दोनों की शादी को भी लंबा समय हो चुका था आशा घर पर अकेले बोर हो जय करती थी वह चाहती थी वह कहीं जॉब करें। मैंने आशा को कहा अगर तुम्हें लगता है तुम्हें कहीं नौकरी करनी चाहिए तो तुम जॉब कर सकती हो। आशा ने नौकरी करने का फैसला कर लिया था आशा जॉब करने लगी थी। हम दोनों की जिंदगी बड़े ही अच्छे से चल रही है आशा और मैं दूसरे को बहुत ही प्यार करते हैं जिस तरीके से हम दोनों एक दूसरे के साथ होते हैं उससे हम दोनों को बड़ा ही अच्छा लगता है।
एक दिन आशा और मैंने साथ में समय बिताने के बारे में सोचा मैं और आशा घुमने चले गए। जब हम दोनो घर लौटे तो डिनर के बाद हम दोनो साथ मे लेटे थे। हम दोनों ने कुछ देर तक बैठकर एक दूसरे से बातें की। मुझे संजना से बातें करना अच्छा लग रहा था और उसे भी बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था मैंने आशा के हाथों को पकड़ा तो वह मुझे कहने लगी मुझे आज तुम्हारे साथ सेक्स करना है। वह मेरी गोद मे बैठ गई मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था वह मेरी गोद में बैठी हुई थी। मैंने आशा के स्तनों को दबाना शुरू कर दिया था जब मैं उसके होठों को चूमने लगा तो मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था। आशा के गुलाबी होंठ मुझे अपना दीवाना बना रहे थे। जब मैं उसके होठों को किस कर रहा था वह मेरी गर्मी को बढाए जा रही थी। हम दोनो के बदन गर्म की गर्मी बढती जा रही थी और मेरी गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था। आशा भी अपने आपको रोक नहीं पा रही थी। हम दोनो तडप रहे थे।
मैंने जब अपने लंड को बाहर निकाला तो उसे संजना ने देखते ही अपने हाथो मे ले लिया था और मुझे बढा मजा आया जब आशा ने मेरे लंड को हाथो मे ले लिया था। मैंने आशा से कहा मेरे लंड को तुम अपने मुंह में ले लो। आशा ने मेरे मोटे लंड को अपने हाथों में पकड़ा और बहुत देर तक हिलाया मुझे मजा आने लगा था। वह मेरे लंड को हिलाकर मेरी गर्मी को बढा रही थी मैं बहुत ही ज्यादा खुश था और आशा भी बड़ी खुश थी जिस तरीके से वह मेरे लंड को हिलाए जा रही थी। उसने बहुत देर तक मेरे लंड को हिलाया। मेरे लंड से पानी निकल रहा था मैंने उसे कहा तुम मेरे लंड को मुंह में ले लो। आशा ने मेरे लंड को अपने मुंह मे ले लिया वह मेरे लंड को सकिंग करने लगी थी। जब वह मेरे लंड को सकिंग करने लगी तो उसको भी मजा आने लगा था और मुझे भी बड़ा मजा आ रहा था। वह जिस तरीके से मेरे लंड को चूस रही थी और मेरी गर्मी को वह बढा रही थी उसने मेरी गर्मी को बहुत ज्यादा बढ रही थी। मेरा लंड पानी छोड चुका था मै पूरी तरीके से गर्म हो चुका था मुझे गर्मी का एहसास होने लगा था।
मैंने आशा को कहा मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है। आशा मुझे कहने लगी मुझे भी बड़ा मजा आ रहा है मुझे तुम्हारे लंड को चूस कर मजा आ रहा है। मैंने आशा के बदन से कपड़े उतार कर उसके बदन को महसूस करना शुरू किया वह तड़पने लगी थी। मैंने आशा के बदन को गरम कर दिया था मैंने जब उसकी योनि पर उंगली को लगाया तो वह मचलने लगी थी वह कहने लगी मुझसे रहा नहीं जा रहा है। मैंने आशा की चूत मे उंगली को घुसा दिया था मुझसे रहा नहीं जा रहा था मैं बहुत ज्यादा गर्म होता चला गया था। मैंने आशा की चूत को चाटना शुरू किया उसकी चूत को चाट कर मुझे गर्मी का एहसास होने लगा था वह बहुत ज्यादा गर्म हो रही थी। मै और आशा गर्म हो चुके थे हम दोनों रह नहीं पा रहे थे। मैंने आशा की चूत पर लंड को टच कर के बाद रगडा तो वह मचलने लगी थी उसकी योनि से पानी निकल रहा था। मैंने धीरे धीरे करके अपने लंड को आशा की योनि में प्रवेश करवा दिया था वह चिल्लाने लगी थी।
मेरा मोटा लंड उसकी योनि के अंदर तक चला गया था मैं आशा को बड़ी तेजी से धक्के देने लगा था। मैंने देखा आशा की चूत से पानी निकल रहा था मुझे मजा आने लगा था और उसे भी अच्छा लग रहा था। मेरे धक्के मे तेजी आती जा रही थी मैं आशा को बड़ी तेज गति से धक्के मार रहा था मैं जिस तरीके से उसे धक्के मार रहा था उससे मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा था और आशा को भी बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था। मेरे धक्के बढने लगे थे और हम दोनो जमकर सेक्स का मजा ले रहे थे। आशा ने मुझे पैरो के बीच मे जकड लिया था वह झड चुकी थी मैं भी आशा की चूत की गर्मी को झेल ना सका और मेरा वीर्य गिरने वाला था। जब मैंने अपने माल को आशा की चूत में गिराया तो मुझे मजा आ गया था। हम दोनो ने जमकर सेक्स के मजे लिए और उसके बाद तीन बार और सेक्स के मजे लिए। हम दोनो को मजा आता है जब भी हम लोग सेक्स करते है।