नखरे वाली आंटी का मैंटेन फिगर

 मेरा नाम सार्थक है मैं लखनऊ का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 28 वर्ष है। मैं फाइनेंस कंपनी में नौकरी करता हूं। मुझे इस कंपनी में नौकरी करते हुए दो वर्ष हो चुके हैं। मेरी मैनेजर के साथ बहुत अच्छी बनती है इसलिए मुझे जब भी कुछ काम होता है तो मैं उन्हें कह देता हूं। वह मुझे हमेशा छुट्टी दे देते हैं। मैं उनके घर का भी छोटा मोटा काम कर लेता हूं। जिससे कि वह मुझसे बड़े खुश रहते हैं और मुझे कभी कुछ भी नहीं कहते। मैं उनको ऑफिस में सबसे ज्यादा मानता हूं। एक दिन मैं घर पर ही था उस दिन मैं ऑफिस के लिए तैयार ही हो रहा था तभी मेरी मम्मी ने मुझे कहा कि बेटा घर में राशन खत्म हो गया है। क्या तुम मेरे साथ चल सकते हो? मैंने अपनी मम्मी से कहा ठीक है मम्मी मैं आपके साथ चलता हूं लेकिन मुझे मेरे ऑफिस में एक फोन करना है। उसके बाद मैं आपके साथ चल पड़ूंगा।
मैंने अपने मैनेजर साहब को फोन किया तो वह कहने लगे कोई बात नहीं तुम थोड़ी देर में आ जाना। मैंने जब उन्हें कहा कि सर मुझे आने में थोड़ा टाइम हो जाएगा। मैं लंच टाइम के बाद ही आ पाऊंगा। वह कहने लगे कोई बात नहीं तुम्हें जब आना हो तब तुम आ जाना। मेरे लिए तो यह नौकरी ऐसी थी जैसे कि घर की नौकरी हो। जब मर्जी चले गए और जब मन किया तो घर आ गए। अपने मैनेजर को मैं हमेशा खुश रखता था इसलिए वह मुझसे भी हमेशा खुश रखते थे। मैंने अपनी मम्मी से कहा ठीक है मम्मी मैं आपके साथ चलता हूं। मैं अपनी मम्मी को लेकर अपने साथ चला गया। मेरी मम्मी गुप्ता जी की दुकान से ही सामान लेती थी। वह सामान उन्हें अच्छे दाम पर मिल जाता था इसलिए मम्मी हमेशा ही गुप्ता जी के पास जाती हैं। उस दिन भी वह मुझे गुप्ता जी के पास ही ले गयी। गुप्ता जी हमें देखते ही पहचान गये। वह कहने लगे और बहन जी घर में सब सही है? मेरी मम्मी कहने लगी हां भाई साहब घर में तो सब कुछ अच्छा है। वह मुझे भी पहचानते थे। वह मुझे कहने लगे और सार्थक तुम्हारी नौकरी कैसी चल रही है? मैंने उन्हें कहा गुप्ता जी नौकरी तो चल ही रही है। आप सुनाइए आपका काम कैसा चल रहा है? वह कहने लगे काम कहां चल रहा है। बस ऐसे ही हम तो अपने दिन काट रहे हैं।
उनका काम इतना ज्यादा होता था कि वह अपने छाती में पैसे गिनते थे और उन्हें बिल्कुल भी फुर्सत नहीं होती लेकिन उसके बावजूद भी वह यही बात कहते कि मेरा काम बिल्कुल भी अच्छा नहीं चल रहा है। मैंने भी उस दिन उन्हें कह दिया कि गुप्ता जी इतने पैसो का क्या करोगे। वह कहने लगे अरे कहां पैसे। हम लोग कहां कमाते हैं। हम तो सिर्फ समय काट रहे हैं। मैंने उनसे कहा कि आप ही यह बात कर रहे हैं तो हमारा क्या होगा। मेरी मम्मी कहने लगी गुप्ता जी आप मुझे सामान दे दीजिए। मेरी मम्मी ने उन्हें सामान की लिस्ट पकड़ा दी और उन्होंने अपने दुकान में काम करने वाले लड़के को सामान की लिस्ट दी। उन्होंने सामान निकलवाना शुरू कर दिया और जब वह हिसाब कर रहे थे तो उसी वक्त मेरी मम्मी की सहेली आ गई। मैं उन्हें नहीं पहचानता था। उस दिन मैं उनसे पहली बार ही मिला था। उनका नाम बबीता है। मेरी मम्मी कहने लगी यह मेरी स्कूल की सहेली है। मैंने अपनी मम्मी से कहा मैंने तो आंटी को कभी भी नहीं देखा है लेकिन वह आंटी बिल्कुल ही बन ठन कर आई हुई थी और ऐसे बिल्कुल भी नहीं लग रही थी कि वह मेरी मम्मी के साथ की होगी। वह मुझे कहने लगे तुम मुझे आंटी मत कहो। मेरा नाम बबीता है। तुम मुझे बबीता कह कर बुला सकते हो। मुझे आंटी शब्द सुनना बिल्कुल भी पसंद नहीं है। जब उन्होंने मुझसे यह कहा तो मैं सोचने लगा कि यह तो बड़ी ही दिखावा कर रही है और आखिरकार है तो उम्रदराज ही। मैंने उन्हें कहा जी बबीता अब से मैं आपको आंटी नहीं कहूंगा। मेरी मम्मी कहने लगी कि बबीता अभी पहले जैसे ही सुंदर है। मैंने बबीता आंटी को कहा कि हां आप तो अब भी पहले जैसी ही सुंदर हैं और आपके चेहरे को देख कर तो बिल्कुल भी नहीं लगता कि आपकी उम्र इतनी ज्यादा होगी। वह मेरी मम्मी से कहने लगी तुम्हारा बेटा तो बड़ी अच्छी बातें करता है। कभी अपने बेटे को अपने साथ में घर पर लाओ। मैंने उनसे पूछा आपका घर कहां है? उन्होंने मुझे अपने घर का पता दे दिया और कहा कि तुम जब भी उस तरफ आओ तो मेरे घर जरूर आना।
मैंने कहा कि आंटी बिल्कुल आपके घर पर मैं जरूर आऊंगा। गुप्ता जी ने भी हमारा सामान रखवा दिया था वह कहने लगे बहन जी मैंने आपका सामान रखवा दिया है। मेरी मम्मी ने उन्हें पैसे दिए और उसके बाद हम दोनों वहां से घर लौट आए। मैं जब घर पहुंचा तो मैंने मम्मी से कहा कि बबिता आंटी तो बडा दिखावा करती है। मेरी मम्मी कहने लगी कि वह एक अच्छे घराने से है और वह पहले से ही इस प्रकार की है। मैंने उन्हें कहा लेकिन उनके बच्चे भी तो होंगे। मेरी मम्मी कहने लगी कि उनका तो अपने पति के साथ कब का डिवोर्स हो चुका है। उनके इसी व्यवहार की वजह से उनके पति ने उन्हें डिवोर्स दे दिया था और वह अब अकेली ही रहती हैं। उसके बाद मैं अपने दफ्तर निकल गया। मैं जब अपने ऑफिस पहुंचा तो मेरे मैनेजर कहने लगे कि तुम मेरे घर का एक छोटा सा काम कर देना। मैंने कहा जी सर मैं आपके घर का काम कर दूंगा। मैं उनके घर निकल गया और उस दिन पूरा दिन मेरा ऐसे ही चला गया। मैं कुछ दिनों बाद बबीता आंटी से मिला। वह मुझे कहने लगी मेरे घर चलो वह बार बार मेरा हाथ पकड़ रही थी और मुझे अपने घर आने के लिए कहने लगी।
मैंने उन्हें कहा नहीं आंटी में दोबारा कभी आ जाऊंगा लेकिन वह जबरदस्ती मुझे अपने साथ ले गई। जब मै उनके घर पर गया तो वह कहने लगी तुम मुझे बबीता आंटी क्यों कह रहे हो। मैंने उन्हें कहा तो मैं आपको क्या कहूं? वह कहने लगी मैंने तुम्हें पहले भी बताया था तुम मुझे बबीता कहकर बुलाया करो। यह कहते हुए उन्होंने मेरे लंड को दबाना शुरू कर दिया और मुझे कहने लगी काफी दिनों से मैंने किसी के लंड को अपनी चूत में नहीं लिया है आज तुम बिल्कुल सही मौके पर मुझे मिले। मैंने उन्हें कहा थोड़ा तो शर्म कीजिए मैं आपकी सहेली का बेटा हूं। वह कहने लगी तुम मेरी चूत की खुजली को मिटा दो। उन्होंने जब मेरे सामने अपने कपड़े खोले तो मेरा लंड उनके बदन को देखकर खड़ा हो गया और उनकी चूत में जाने के लिए तैयार हो गया। उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह में लिया। वह मेरे लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे उनके लिए कोई मामूली चीज हो लेकिन मुझे भी बहुत मजा आया। मैंने उनके बदन का रसपान किया तो उन्होंने अपने फिगर को मेंटेन किया हुआ था। मैंने जैसे ही उनकी योनि पर लंड को लगाया तो वह कहने लगी तुम दिखने में तो छोटे हो लेकिन तुम्हारे अंदर भी कम गर्मी नहीं है तुम आगे चलकर बड़े चोदू बनोगे। यह कहते हुए उन्होंने मुझे कहा तुम मेरी चूत की खुजली मिटा दो। मैंने भी अपने 9 इंच मोटा लंड को उनकी योनि के अंदर प्रवेश करवा दिया। जैसे ही मेरा लंड उनकी योनि के अंदर गया तो वह चिल्लाने लगी और कहने लगी बेटा तुम और भी तेजी से मुझे धक्के मारो। मैंने उनके दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया और बड़ी तेज गति से धक्के देने शुरू कर दिए। मेरे धक्के ने देखा था कि मुझे बहुत मजा आता और बबीता को भी बहुत मजा आ रहा था वह मेरा पूरा साथ दे रही थी। वह अपने दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए मुझे कहने लगी तुम और भी तेजी से मेरी चूत मारो मुझे बहुत मजा आ रहा है। मैंने भी उनके दोनों जांघों को पकड़ लिया और अपने लंड को बड़ी तेजी से अंदर बाहर करने लगा। मेरा लंड इतनी तेजी से उनकी योनि के अंदर बाहर होता कि मुझे भी मजा आने लगा। मैं उनके हुस्न का जाम पीने लगा। मैंने जब उनकी दोनों टांगों को अपने कंधों पर रखा तो वह कहने लगी तुमने यह बात बहुत अच्छी कि मुझे इस पोज में अपनी चूत मरवाने मे बहुत अच्छा लगता है। मैंने उनके चूतडो पर बड़ी तेज प्रहार किया जब वह झड गई तो वह चुपचाप से लेट गई वह मुझे कुछ भी नहीं कह रही थी। मैं उनकी चूत तेजी से मारे जा रहा था लेकिन जैसे ही मेरा गर्मा गर्म वीर्य उनकी योनि के अंदर गिरा तो वह खुश हो गई। वह कहने लगी बेटा तुम मेरे पास हमेशा आ जाया करो उन्होंने मुझे उसके बदले पैसे भी दिए। मैं उनके पास हमेशा जाने लगा।