मैंने अकिता की चूत में माल गिराया

मैं अपने ऑफिस जाने के लिए अपने दोस्त का इंतजार कर रहा था मेरा दोस्त जो कि मुझे लेने के लिए मेरे घर पर आने वाला था लेकिन अभी तक वह आया नहीं था। मैंने उसे फोन किया और कहा कि तुम अभी कहां पहुंचे तो वह मुझे कहने लगा कि मैं बस थोड़ी देर में ही तुम्हारे घर पर आ रहा हूं। थोड़ी देर के बाद वह मेरे घर पर आ गया था जब वह घर पर आया तो हम दोनों साथ में ही ऑफिस गए। मेरी मोटरसाइकिल खराब थी इसलिए मैंने अपने दोस्त को कहा था कि तुम मुझे भी अपने साथ ऑफिस लेकर चलना। जब हम लोग ऑफिस पहुंचे तो उस दिन ऑफिस में कुछ ज्यादा ही काम था और मुझे उस दिन घर लौटने में भी काफी ज्यादा देरी हो गई थी।
जब मैं घर लौटा तो मुझे बहुत ज्यादा देर हो गई थी पापा और मम्मी मेरा इंतजार कर रहे थे उन लोगों ने तब तक खाना नहीं खाया था। मैंने घर आकर पापा से कहा कि आप लोगों ने अभी तक खाना क्यों नहीं खाया तो वह लोग कहने लगे कि सुभाष बेटा हम लोग तुम्हारा ही इंतजार कर रहे थे। मैंने उन्हें कहा कि मैं आप लोगों को फोन नहीं कर पाया लेकिन आज रास्ते में भी आते वक्त काफी ज्यादा ट्रैफिक हो गया था और ऑफिस में काम भी ज्यादा था। मेरे घर से मेरे ऑफिस की दूरी करीब एक घंटे की है लेकिन उस दिन मुझे घर पहुंचने में दो घंटे लग गए थे रास्ते में बहुत ही ज्यादा ट्रैफिक था। हम लोगों ने साथ में डिनर किया उस दिन जब हम लोग डिनर कर रहे थे तो पापा ने मुझे कहा कि सुभाष बेटा कल तो तुम्हारी छुट्टी होगी। मैंने कहा हां पापा कल मेरी छुट्टी है और कल मैं घर पर ही हूं पापा ने मुझे कहा कि बेटा मैं सोच रहा हूं कि कल तुम अपनी बहन को मिल आते।
मैंने पापा से कहा कि ठीक है मैं कल दीदी से मिल आऊंगा। अगले दिन मैं दीदी को मिलने के लिए गया तो मुझे वहीं रुकना पड़ा और मैं अपने ऑफिस भी दीदी के घर से ही चला गया था। दीदी के घर से मेरा ऑफिस ज्यादा दूर नहीं है वहां से मुझे सिर्फ 15 मिनट ही जाने में लगते हैं और मैं उस दिन दीदी के घर से ही अपने ऑफिस के लिए गया। शाम को मैं जब अपने घर लौटा तो उस दिन मुझे अंकिता मिली, अंकिता से मैं काफी दिनों के बाद मुलाकात कर रहा था। अंकिता हमारी कॉलोनी में ही रहती है और वह मेरे साथ मेरे कॉलेज में पढ़ा करती थी अंकिता और मेरे बीच काफी अच्छी बातचीत है। अंकिता उस दिन बहुत ज्यादा परेशान लग रही थी मैंने उससे उसकी परेशानी का कारण पूछा तो उसने मुझे कुछ भी नहीं बताया लेकिन मैंने जब उससे कहा कि तुम आज बहुत ही ज्यादा परेशान लग रही हो तो वह मुझे कहने लगी कि हां आज मुझे तुम्हें कुछ बताना है।
उस दिन अंकिता ने मुझे अपनी सगाई के बारे में बताया मुझे उसकी सगाई के बारे में कोई भी जानकारी नहीं थी। उसकी सगाई को हुए कुछ ही दिन हुए थे लेकिन जिस लड़के से उसकी सगाई हुई थी उसके परिवार वाले अंकिता के पिताजी से दहेज की मांग कर रहे थे जिससे कि अंकिता को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा और अंकिता ने अपनी सगाई तोड़ने का फैसला कर लिया। अंकिता ने अपनी सगाई तोड़ दी थी जिसकी वजह से उसके रिश्तेदारों के बीच में उनके परिवार की काफी बदनामी हुई थी। अंकिता इसी बात को लेकर बहुत ज्यादा परेशान थी और अंकिता ने उस दिन मुझे जब यह बताया तो मैंने अंकिता को कहा कि अंकिता तुम्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है लेकिन अंकिता तो बहुत ही ज्यादा परेशान थी। उस दिन उसने मुझे यह बात बताई तो मुझे भी यह सुनकर बुरा जरूर लगा था। हालांकि उस दिन हम लोगों की ज्यादा देर तक तो बात नहीं हुई थी मैंने अंकिता को कहा कि मैं तुमसे कुछ दिनों में मिलता हूं और फिर मैं अपने घर लौट आया था।
मैं अंकिता से कुछ दिनों बाद मिला जब मैं अंकिता को मिला तो उस दिन मैंने अंकिता के साथ में काफी अच्छा समय बिताया और अंकिता भी बहुत खुश थी। अंकिता भी अब अपनी सगाई को भूलने लगी थी और समय के साथ-साथ वह भी अब आगे बढ़ चुकी थी। अंकिता ने मुझे बताया कि उसकी नौकरी एक अच्छी कंपनी में लग चुकी है जिससे कि वह बहुत ही ज्यादा खुश है। अंकिता की जॉब कुछ दिनों पहले ही लगी थी और वह बड़ी खुश थी जिस तरीके से उसकी जॉब चल रही है। अंकिता को बहुत ही अच्छा लगता जब भी अंकिता मुझसे मिला करती। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि अंकिता और मेरे बीच मिलना कुछ ज्यादा ही होने लगेगा। मुझे अंकिता का साथ अच्छा लगने लगा था और अंकिता को भी मेरा साथ बहुत ही अच्छा लग रहा था। जिस तरीके से हम दोनों साथ में थे उससे हम दोनों बड़े ही खुश होते और मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लगता था जब अंकिता और मैं एक दूसरे के साथ में होते। हम दोनों एक दूसरे को प्यार करने लगे थे मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं प्यार कर बैठूंगा और हम दोनों का रिलेशन चलने लगेगा।
हम दोनों एक दूसरे को बहुत ही अच्छे से समझते हैं और जिस तरीके से हम दोनों एक दूसरे के साथ होते तो हम दोनों को ही बड़ा अच्छा लगता है। मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लगता था जब भी हम एक दूसरे के साथ समय बिताया करते हैं और एक दूसरे के साथ जब भी हम लोग होते तो हम दोनों बड़े ही खुश होते थे। अंकिता और मैं एक दूसरे को बहुत ज्यादा प्यार करने लगे थे इसलिए हम दोनों एक दूसरे के बहुत ही ज्यादा करीब आ चुके थे और मैं चाहता था अंकिता के साथ मै शारीरिक सुख के मजे लूं। मैंने एक दिन अंकिता से रात को फोन पर बड़ी गरमा गरम बातें कि उस दिन हम दोनों की जब फोन पर बातें हुई तो हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए तड़पने लगे थे। मैं बहुत ही ज्यादा खुश था जब अंकिता और मै एक दूसरे के साथ सेक्स करने वाले थे। मै अंकिता के घर पर गया था क्योंकि उसके घर पर कोई भी नहीं था इसलिए हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स करना चाहते थे। जब मैं और अंकिता एक दूसरे के साथ में थे तो मैंने अंकिता के होंठों को चूमना शुरू कर दिया उसके गुलाबी होठों को चूम कर मै बड़ा खुश था।
मै जिस तरीके से उसके होठों को चूम रहा था उससे हम दोनों पूरी तरीके से गर्म होते जा रहे थे और हम दोनों की ही गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी। जब हम दोनों की गर्मी बढ़ने लगी तो मैं अपने आपको रोक ही नहीं पाया था ना ही अंकिता अपने आपको रोक पाई थी। मैने उसके होठों से खून में निकाल दिया था मेरी गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी। मैंने जब अंकिता के बदन से उसके कपड़ों को उतारा तो मैं उसके नंगे बदन को देखकर बड़ा ही खुश था और उसकी गर्मी को मैं बढ़ाए जा रहा था। मैंने अंकिता की चूत के अंदर अपने लंड को घुसाने का फैसला कर लिया था जैसे ही मैंने उसकी चूत में अपने मोटे लंड को डाला तो वह खुश हो गई और मुझे बोली मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। मैं अंकिता की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को किए जा रहा था जिस तरीके से मैं उसकी चूत के मजे ले रहा था उससे हम दोनों ही बहुत ज्यादा खुश हो गए थे। जब हम दोनों की गर्मी बढ़ने लगी थी तो हम दोनों बिल्कुल भी रह ना सके। ना तो मैं अपने आपको रोक पा रहा था और ना ही अंकित आप आपको रोक पा रही थी हम दोनों बहुत ज्यादा गर्म होने लगे थे।
जैसे ही मैंने अंकिता की चूत मे अपने माल को गिराया तो उसकी इच्छा पूरी हो चुकी थी। मैं बहुत ज्यादा खुश हो गया था जिस तरह उसके साथ मैने सेक्स संबंध बनाया था और हम दोनों ने एक दूसरे के साथ में सेक्स किया था। हम दोनों को ही बड़ा अच्छा लगा था जब हम दोनों ने एक दूसरे के साथ सेक्स किया था। हम दोनों को बहुत ही अच्छा लगता था लेकिन अब अंकिता मेरे बिना बिल्कुल भी रह नहीं पाती थी। जब भी हम दोनों अकेले होते तो हम दोनों एक दूसरे के साथ में शारीरिक सुख का मजा लेने के लिए हमेशा ही तैयार रहते। मैं बहुत ही ज्यादा तड़पता था जिस तरीके से मै और अंकिता एक दूसरे के साथ में सेक्स संबंध बनाया करते थे। हम दोनो एक दूसरे की गर्मी को बहुत बढा दिया करते थे हम दोनों की गर्मी बहुत ही ज्यादा बढ़ जाती है। हम दोनों एक दूसरे के साथ जमकर सेक्स का मजा लिया करते है। मैंने एक दिन अंकिता को अपने घर पर बुला लिया और उस दिन जब मैंने अंकिता को घर पर बुलाया तो मैं अंकिता की चूत मारने के लिए तैयार था और वह भी अपनी चूत मरवाने के लिए बड़ी उतावली थी। मैंने अंकिता के बदन को इतना ज्यादा गर्म कर दिया वह बिल्कुल भी रह ना सकी और मेरे सामने उसने अपने कपड़ों को खोलते हुए कहा मुझे तुम तेजी से चोदते जाओ।
मैंने उसकी चूत को अपनी तरफ करते हुए जैसे ही उसकी योनि में मैंने अपने लंड को प्रवेश करवाया तो अब वह बिल्कुल भी रह ना सकी और मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है। मैंने और अंकिता ने एक दूसरे के साथ अच्छे से सेक्स कर रहे थे। जब हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स संबंध बना रहे थे तो हम दोनों को ही बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था। जिस तरीके से मैंने और अंकिता ने एक दूसरे के साथ में संबंध बनाए थे मैं बहुत ही ज्यादा खुश था। मैं और अकिंता एक दूसरे के साथ में बड़े अच्छे से चुदाई का मजा ले रहे थे जैसे ही मेरा वीर्य अंकिता की चूत में गिरा तो वह खुश हो गई और मैं भी बड़ा खुश था जिस तरीके से मैंने अकिंता की चूत मे अपने माल को गिराया था और उसकी इच्छा को मैंने पूरा किया था।