पडोसन भाभी ने मुझ पर हाथ रख दिया

मेरे गलत फैसले के चलते घर की स्थिति काफी ज्यादा खराब हो चली थी घर में बिल्कुल भी पैसे नहीं थे और बच्चों की फीस के लिए भी मुझे अपने दोस्तों से पैसे लेने पड़े। अब किसी प्रकार से मैं अपने बच्चों की फीस तो जमा कर चुका था लेकिन उसके बाद भी घर के काफी खर्चे थे जिसे कि मैं किसी तरीके से पूरी करने की कोशिश किया करता। एक दिन मेरी पत्नी कविता कहने लगी कि संजय आप अपने मामा जी से क्यों मदद नहीं ले लेते तो मैंने कविता से कहा कि कविता मैं मामा जी से मदद लेना नहीं चाहता। कविता कहने लगी कि अब आप ही बताइए की ऐसी स्थिति में फिर क्या करना चाहिए। मेरे मामा जी का बहुत बड़ा कारोबार है और वह दिल्ली में रहते हैं मेरे पास फिलहाल कोई काम नहीं था तो मुझे भी अब लगने लगा कि मुझे अपने मामा जी की मदद लेनी ही पड़ेगी।
मैंने जब मामा जी को फोन किया तो उन्होंने मुझे कहा कि संजय बेटा तुम कैसे हो तो मैंने उन्हें बताया मैं तो ठीक हूं लेकिन आप बताइए आप कैसे हैं मामा जी को मैंने अपनी स्थिति के बारे में बताया तो वह मुझे कहने लगे कि संजय तुमने मुझे बताया क्यों नहीं। जब से मां का देहांत हुआ है उसके बाद मामा जी का हमारे घर पर आना भी बहुत कम हो पाता है। पिताजी का भी पहले बड़ा कारोबार हुआ करता था लेकिन उनके कारोबार के नुकसान की वजह से वह मानसिक रूप से काफी ज्यादा परेशान होने लगे थे जिस वजह से वह काफी बीमार रहने लगे और उनकी कुछ समय पहले ही मृत्यु हो गई। मामा जी मुझसे बात कर रहे थे तो उन्होंने मुझे कहा कि संजय तुम कुछ दिनों के लिए दिल्ली आ जाओ। मामा जी कहने पर मैंने दिल्ली जाने का फैसला कर लिया था क्योंकि मेरे पास इसके अलावा कोई और रास्ता बचा ही नहीं था और मैं दिल्ली चला गया। मैं जब दिल्ली गया तो दिल्ली जाते वक्त मुझे बस में एक लड़का मिला उसकी उम्र यही कोई 25 26 वर्ष की रही होगी वह मुझसे बात करने लगा और मैं भी उससे बात करने लगा लेकिन मुझे नहीं पता था कि वह एक चोर है।
बस में ना जाने मेरी कब आंख लगी और मैं जब उठा तो मैंने देखा कि मेरा बैग मुझे मिल नहीं रहा था अब मुझे समझ तो आ चुका था कि मेरा बैग चोरी हो चुका है उसके बाद मेंरे पास बिल्कुल भी पैसे नहीं थे। मैं जब दिल्ली पहुंचा तो मैंने अपने मामा जी को फोन किया और उन्होंने मुझे कहा कि बेटा तुम कहां हो। मैंने उन्हें सारी बात बताई और कहा कि मेरा बैग बस में चोरी हो गया था इसलिए मेरे पास पैसे नहीं है तो उन्होंने मुझे कहा कि तुम वहीं पर रुक जाओ मैं तुम्हें लेने के लिए आता हूं। मामा जी मुझे लेने के लिए आए जब वह मुझे लेने के लिए आए तो उसके बाद मैं और मामा जी उनके घर चले गए। मैं काफी समय बाद मामा जी से मिल रहा था तो मामा जी मुझसे कहने लगे कि संजय बेटा तुम दिल्ली भी नहीं आते हो और तुम यह बताओ तुम्हारे परिवार में सब लोग कैसे हैं। मैंने मामा जी को कहा मामा जी घर में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। मामा जी उस वक्त घर पर अकेले ही थे मैंने उनसे कहा कि मामी जी नजर नहीं आ रही तो वह कहने लगे कि वह कुछ दिनों के लिए अपने मायके गई हुई हैं और वह सुहानी को भी अपने साथ लेकर गई हुई है। सुहानी मामा जी की बेटी का नाम है मामा जी मुझसे कहने लगे कि संजय बेटा तुम बताओ तुम्हें क्या परेशानी है। मैंने उन्हें सारी बात बताई तो वह मुझे कहने लगे कि तुम्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है मैं सब कुछ ठीक कर दूंगा। मुझे मामा जी पर पूरा भरोसा था कि वह सब कुछ ठीक कर देंगे उन्होंने मुझे कहा कि कल से तुम मेरे साथ काम पर चलना। मैंने मामा जी को कहा ठीक है और अगले दिन से मैं मामाजी के साथ काम पर जाने लगा उन्होंने मुझे अपने ऑफिस में ही काम पर रख लिया था। वह मुझे हर महीने की एक तारीख को पैसे दे दिया करते थे और मैं उन पैसों को घर भिजवा दिया करता था मैं चाहता था कि मैं अब अपनी पत्नी और बच्चों को भी अपने पास बुला लूं। मैंने अपनी पत्नी को फोन किया और उसे कहा कि तुम लोग भी दिल्ली आ जाओ तो वह मुझे कहने लगे कि लेकिन हम लोग दिल्ली क्या करेंगे। मैंने उसे कहा कि तुम दिल्ली आ जाओ मुझे लग रहा है कि मैं तुम लोगों का खर्चा अब अच्छे से उठा सकता हूं।
मैंने अपनी पत्नी और बच्चों को दिल्ली बुला लिया जब वह लोग दिल्ली आ गए तो दिल्ली में ही मैंने अपने बच्चे का दाखिला एक स्कूल में करवा दिया। मेरी पत्नी अब नौकरी करने लगी थी क्योंकि वह पढ़ी लिखी थी इसलिए वह चाहती थी कि वह नौकरी करें। वह नौकरी करने लगी थी तो मुझे भी आर्थिक रूप से मदद मिलने लगी थी धीरे-धीरे हम लोगों ने पैसे जोड़ने शुरू कर दिये और एक समय ऐसा आया जब हम लोग घर लेने वाले थे। मैंने मामा जी से कहा कि मामा जी अब मैं अपना घर लेना चाहता हूं तो वह मुझे कहने लगे कि संजय बेटा अगर तुम्हें कुछ पैसों की जरूरत हो तो तुम मुझे बता देना। मामा जी ने मेरा घर लेने में काफी मदद की और उन्होंने मुझे पैसे भी दिये। जब उन्होंने मुझे पैसे दिए तो उसके बाद मैंने घर खरीद लिया था जिस कॉलोनी में मैंने घर लिया वहां पर घर ज्यादा बड़ा नहीं था लेकिन फिर भी हम लोग वहां पर रह सकते थे। मेरी पत्नी इस बात से बहुत ज्यादा खुश थी और वह कहने लगी कि संजय आपकी मेहनत आखिर रंग लाई गई।
मैंने अपनी पत्नी से कहा कि इसके लिए मुझे कितनी मेहनत करनी पड़ी और इसमे तुमने मेरा साथ भी तो दिया है इसीलिए तो आज हम लोग अपना घर करीब पाए हैं। हम लोग बहुत ही खुश थे मैं अपने छोटे परिवार के साथ काफी खुश था और मेरी जिंदगी भी अच्छे से चलने लगी थी। मामा जी का मुझ पर बहुत बड़ा एहसान था यदि वह मेरी मदद नहीं करते तो शायद मैं अपना घर खरीद ही नहीं पाता और ना ही अपने परिवार को मैं कभी वह खुशियां दे पाता। अब सब कुछ अच्छे से चलने लगा था मैं अपने परिवार के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की कोशिश किया करता। मुझे बहुत ही अच्छा लगता जब मैं अपने परिवार के साथ समय बिताया करता। मैं अपने परिवार को हर वह खुशी देने की कोशिश कर रहा था जिसके कि वह हकदार थे। मैं उस वक्त अपनी खुशियों से भटकने लगा जब हमारे पड़ोस में रहने वाली कविता भाभी जो कि दिखने में बहुत ही सुंदर है उन्हें देखकर हमारी कॉलोनी के आधे से ज्यादा पुरुष उनकी तरफ फिदा थे। उन्होंने तो जैसे मुझे चुन लिया था वह चाहती थी मैं उनकी रात को बस रंगीन बना दूं और इसी के चलते एक दिन जब उन्होंने मुझे अपने घर पर बुलाया तो मेरे लिए यह बहुत ही अच्छी बात थी मैं उनसे मिलने के लिए उनके घर पर चला गया। मैं जैसे ही घर पर गया तो वह घर पर अकेली थी कविता भाभी ने मुझे कहा तुम बेडरूम में आ जाओ हम दोनों साथ में बैठे हुए थे। हम दोनों साथ में बैठे हुए थे हमारी गर्मी बढ़ती ही जा रही थी। जब मैंने कविता भाभी की जांघ पर अपने हाथ को रखा तो वह मचलने लगी उन्होंने मुझे कहा मुझे अपनी बाहों में भर लो। मैं भी तडपने लगा था मै उन्हें अपनी बाहों में भरने के लिए मैं बेताब था। मैंने उनसे कहा आप अपने कपड़े उतार दीजिए उन्होंने अपने कपड़े उतार दिए वह मेरे सामने अपना नंगी थी यह सब देख मैं बिल्कुल रह ना सका। मैने उन्हें कहा आपको चोदना ही पड़ेगा मैंने अपने लंड को बाहर निकाला वह मेरे लंड को देखकर बोली तुम्हारा लंड बहुत मोटा है।
मैं यह देखकर बहुत ज्यादा खुश हो गया था मै अपने अंदर की आग को पूरी तरीके से बढ़ाना चाहता था मैंने उन्हें कहा आप मेरे लंड को चूसो तो वह मेरे लंड को चूसने लगी जब वह ऐसा करती तो मेरे अंदर के आग बढ़ती ही जा रही थी और मुझे बहुत ज्यादा मजा आने लगा था। मेरे अंदर की आग अब इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थी कि मैं बिल्कुल भी अपने आपको रोक नहीं पा रहा था मैं बिल्कुल भी रह नहीं पाया। मैंने भाभी की चूत को चाटकर पूरी तरीके से चिकना बना दिया जब उन्होंने कहा कि तुम मेरे ऊपर से लेट जाओ तो मैंने उनकी चूत मे अपने लंड को घुसा कर उन्हें अपना दीवाना बना दिया। मैंने उनके पैरों को खोल कर उन्हें बड़ी तेजी से धक्के देने शुरू किए वह मुझे कहने लगी मुझे ऐसे ही धक्के मारते रहो मैं उनको बड़ी तेज गति से धक्के मार रहा था जिससे कि वह संतुष्ट हो रही थी।
वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा है तुम ऐसे ही मेरी चूत के मजे लेते रहो। मैंने उन्हें कहा कि भाभी मैं आपकी चूत मे माल गिराना चाहता हूं करीब 5 मिनट के बाद मैंने अपने माल को उनकी चूत के अंदर गिरा दिया था वह खुश हो गई और कहने लगी आज तो मजा ही आ गया। उन्हें पूरा मजा आ चुका था मैंने जब उन्हें घोड़ी बनाकर चोदना शुरू किया तो वह खुश हो गई और अपनी चूतड़ों को मुझसे वह ऐसे टकरा रही थी जैसे कि मेरे लंड को वह चूत के अंदर ही लेकर रखे मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। मैंने उन्हें बड़ी तेज गति से चोदा वह खुश हो गई थी उसके बाद जब मैंने अपने माल को उनकी चूत में गिराकर उन्हें संतुष्ट किया तो वह कहने लगी आज मजा ही आ गया उनको बहुत मजा आ चुका था वह मेरे लंड को तब तक चूसती रही जब तक उन्होंने मेरे लंड से पानी बाहर नहीं निकाल दिया और मेरी गर्मी को उन्होंने शांत नहीं कर दिया। मैं बहुत ही ज्यादा खुश हो गया था वह भी बड़ी खुश हो चुकी थी मेरा जब भी मन होता तो मैं भाभी के पास चला जाया करता।